राष्ट्रीय उत्थान में आंगनबाड़ी कार्यक्रम में संलग्न महिला कार्यकर्ताओं की भूमिका

 

हेमलता बोरकर

वरिश्ठ सहायक प्राध्यापक, समाजशास्त्र अध्ययनषाला, पं. रविषंकर षुक्ल विष्वविद्यालय, रायपुर

 

सारांश

भारत की कुल जनसंख्या मे लगभग 13 प्रतिषत 0-6 वर्श से कम उम्र के बच्चों की उपस्थिति है। कुपोशण में भी भारत प्रथम रेंक स्थान है। 43.5 प्रतिषत बच्चे औसत वजन से कम वजन के है। पिछले दषक में भारत की विस्मत कर देने वाली प्रगति के बावजूद भारत विष्व के उन देषों में से एक है, जहां कुपोशण दर सबसे ज्यादा है। कुपोशण से करीब 45 फीसदी बच्चों का विकास अवरुद्ध हो जाता है, 75 फीसदी बच्चे रक्तअल्पता से पीड़ीत होते हैं एवं 57 फीसदी बच्चे विटामिन । की कमी का षिकार बन जाते है, जिसका सीधा असर बच्चों के मस्तिश्क पर पड़ता है जिसका समाज पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष प्रभाव देखा जा सकता है। मातृव्य मृत्यु दर एवं कुपोशण की समस्या पर रोकथाम लगाने के लिए भारत सरकार द्वारा वर्श 1975 में 33 विकासखण्डों में आंगनबाड़ी कार्यक्रम का प्रारंभ किया गया। वर्तमान में 5421 विकासखण्डों में आंगनबाड़ी केन्द्र चलाए जा रहे है। इस कार्यक्रम का लाभ 0 से 6 वर्श की आयु के 39 मिलियन बच्चे एवं 8 मिलियन गर्भवती एवं षिषुवती महिलाओ को मिल रहा है। यह सेवा विष्व में षिषु एवं मताओं के बचाव और विकास के लिए चलाया जा रहा अकेला सबसे बड़ा कार्यक्रम है। इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों मे 300-1500 की जनसंख्या पर एक आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित है। जिसमे आंगनबाड़ी महिला कार्यकर्ता कार्यरत है, जो 0-6 वर्श तक के बच्चो, गर्भवती एवं षिषुवती महिलाओं के लिए टीकाकरण, पोशण, आहार, षिक्षा एवं परामर्ष सेवाएं देने का कार्य करती है।

 

षब्द कुंजी- राश्ट्रीय उत्थान, आगंनबाड़ी कार्यक्रम, महिला कार्यकर्ता एवं भूमिका निर्वहन

 

उद्देश्य रू

1.     आंगनबाड़ी कार्यक्रम के लाभार्थियों के स्वास्थ्य एवं जागरुकता के स्तर का अध्ययन करना।

2.     षिषु जन्मदर एवं मातृव्य मृत्यु दर का अध्ययन करना।

 

अध्ययन पद्धतिः-

भारत एवं छ.. राज्य के 0-6 वर्श के बच्चे के कुपोशण एवं मृत्युदर के आंकड़ों को दिखाने का प्रयास किया गया है, साथ ही मातृव्य मृत्यु दर संबंधी आंकड़े भी प्रस्तुत है। आंगनबाड़ी लाभार्थियों के स्वास्थ्य एवं पोशण स्तर को देखने हेतु रायपुर नगर के कुल 577 आंगनबाड़ी केन्द्रों में से 11 केन्द्र का चुनाव उद्देष्यपूर्ण निदर्षन द्वारा किया गया है। 11 आंगनबाड़ी केन्द्र में पदस्थ 10 कार्यकर्ताओं एवं प्रत्येक आंगनबाड़ी में पंजीकृत 0-6 आयु वर्ग के बच्चों, षिषुवती एवं गर्भवती महिलाओं के पोशण एवं स्वास्थ्य गति स्थिति को ज्ञात करने का प्रयास किया गया है। साक्षात्कार अनुसूची उपकरण के माध्यम से अध्ययन विशय से संबंधित तथ्यों का संकलन किया गया है

 

परिणामः-

रायपुर नगर के 11 आंगनबाड़ी केन्द्रों में पंजीकृत 0-6 वर्श के बच्चों की संख्या 840 गर्भवती महिलाओं की संख्या 107 षिषुवती माताओं की संख्या 114 है। 0-6 आयु वर्ग के कुल कुपोशित बच्चों की संख्या 168 है जिसमें 50 बालक एवं 118 बलिकाएं है।

 

प्रत्येक आंगनबाड़ी केन्द्र में कार्यकŸााओं द्वारा 0-6 वर्श के बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण वजन चाट के हिसाब से निकाला जाता है। महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण हिमोग्लोबिन, बी.पी. एवं उनके वजन के हिसाब से किया जाता है। इसके आलावा समय-समय पर उनकी आंखो की जांच एवं बौद्धिक क्षमता के परीक्षण किया जाता है। इसी प्रकार सामान्य एवं कुपोशित बच्चों के लिए फुड़ चार्ट उपलब्ध कराया जाता है ताकि इन बच्चों को स्वास्थ्य के अनुसार भोजन उपलब्ध हो सके।

 

पूरक पोशण आहार का उद्देष्य 0-6 वर्श के आयु के बच्चों, गर्भवर्ती माताओं एवं षिषुवती माताओं में पोशण के द्वारा उनके स्वास्थ्य के स्तर को ऊंचा करना है। इसके लिए प्रत्येक आंगनबाड़ी केन्द्र को लाभार्थियों को पोशण आहार वितरण करने के लिए आहार मेनु चार्ट दिया जाता है, जिसमें आहार की क्वालिटी को ध्यान में रखा गया है जिसमें प्रोटीन, कैलोरी प्रदान करने वाले अनाज जैसे-गुड़, सोयाबिन, दाल को षामिल किया गया है। छ.. के प्रत्येक जिले के आंगनबाड़ी केन्द्र में यह अनाज लाभार्थियों को प्रदान किये जाते है। राजनांदगांव जिले में वर्शाऋतु के समय गुड़ एवं सोयाबिन लाभार्थियों को प्रदान नही दिया जाता, क्योंकि इस समय इसमें कवक लग जाता है।

  

निश्कर्श

वर्तमान समय में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरत महिलाओं में स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता लाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। बच्चो के स्वास्थ्य जन्मदर में वृद्धि एवं मातृव्य दर में कमी आयी है। आंगनबाड़ी कार्यकत्र्ता अपनी बुद्धि के आधार पर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं में स्वास्थ्य एवं षिक्षा के प्रति जागरुकता लाने में सफल सिद्ध हो रही है जिसका प्रत्यक्ष प्रभाव भारतीय समाज पर देखा जा सकता है।

 

संदर्भ सूची

1.       Child mortality rate 2011, UNPD, WHO, World Bank

2.       CIA work fact book-Jan 2011,

3.       Department women and child development 2010

4.       Economical survey of Chhattisgarh 2009-10 (C.G. Govt).

5.       Monthly progress report of ICDS and Economics and Statistics                 Department 2010

6.       Reports of SNP and from 7 maintained by project offices year                  2010

7.       SRS bulletin 2010

 

 

 

 

Received on 11.03.2013       Modified on 01.04.2013

Accepted on 12.04.2013      © A&V Publication all right reserved

Int. J. Rev. & Res. Social Sci. 1(1): July –Sept. 2013; Page 14-17